NIT BLOG
Monday, February 25, 2019
बात जब तेरे जीत की हो
तुम खुश हो तो मै हार भी सकता हु इश्क़ मे
बस बात तुम्हारे जीतने की हो.
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इश्क के गम
अपना गम किस किस से बोला जाए हैं कितनी परेशानियां इश्क़ में इसे कैसे तौला जाए
चिंता
सबको जीना है सबको मरना हैं छोड़ो ब्यर्थ की चिंता जो नसीब में है वहीं मिलना है
समय
बहुत कुछ सीखा है समय से दिल्लगी भी दिखा दी गरीबी भी दिखा दी अब अमीरी बाकि हैं
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