NIT BLOG
Wednesday, January 9, 2019
इश्क़ वाला मर्ज
मर्ज होता तो दवा से भी ठीक हो जाता
वो तो इश्क़ था... हकीम भी मुकर गया
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इश्क के गम
अपना गम किस किस से बोला जाए हैं कितनी परेशानियां इश्क़ में इसे कैसे तौला जाए
चिंता
सबको जीना है सबको मरना हैं छोड़ो ब्यर्थ की चिंता जो नसीब में है वहीं मिलना है
समय
बहुत कुछ सीखा है समय से दिल्लगी भी दिखा दी गरीबी भी दिखा दी अब अमीरी बाकि हैं
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