NIT BLOG
Monday, January 28, 2019
इश्क़ वाले फासले
फासले भी होंगे इश्क़ मे, मेरे जहन मे नही था
जैसा तुम सोच रहे थे वैसा मेरे मन में नही था
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इश्क के गम
अपना गम किस किस से बोला जाए हैं कितनी परेशानियां इश्क़ में इसे कैसे तौला जाए
चिंता
सबको जीना है सबको मरना हैं छोड़ो ब्यर्थ की चिंता जो नसीब में है वहीं मिलना है
समय
बहुत कुछ सीखा है समय से दिल्लगी भी दिखा दी गरीबी भी दिखा दी अब अमीरी बाकि हैं
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