NIT BLOG
Sunday, January 27, 2019
शायरी
आधे से कुछ ज्यादा पूरे से कुछ कम
थोड़ा सा इश्क़ थोड़ा सा गम..
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इश्क के गम
अपना गम किस किस से बोला जाए हैं कितनी परेशानियां इश्क़ में इसे कैसे तौला जाए
चिंता
सबको जीना है सबको मरना हैं छोड़ो ब्यर्थ की चिंता जो नसीब में है वहीं मिलना है
समय
बहुत कुछ सीखा है समय से दिल्लगी भी दिखा दी गरीबी भी दिखा दी अब अमीरी बाकि हैं
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